बाबा रामदास हनुमान मन्दिर का संक्षिप्त इतिहास

एकादश रूद्र के अवतार हनुमान सकलगुणों की खान है। पराक्रम, उत्साह, प्रताप, सुशीलता, मधुरता, विवेक और चतुराई में वह अद्वितीय हैं। रामदूत, अपूर्व बलधाम, शत्रुओं के लिए कालस्वरूप, ज्ञानियों के सिरमौर और विघ्न विनाशक हैं। उनके दर्शन मात्र

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से बाधाएँ चकनाचूर हो जाती हैं और सफलता साधक के पग चूमने लगती है।
लगभग पचपन वर्ष पूर्व परमपूज्य श्री 1008 सन्तशिरोमणि बाबा रामदास (धौलपुर वाले) के आदेश पर प्रकृति के सुषमा-सम्पन्न वातावरण में रामनवमी के पावन पर्व सन् 1952 में गुप्ता नर्सरी के समीप बड़ा बाग में इस मंदिर की स्थापना हुयी। श्री किशन लाल जी ने भूमि का दान किया और श्री वासुदेवशरण ने इस सिद्धधाम का निर्माण कराकर दक्षिण मुखी श्री विग्रह की स्थापना की। आरम्भ से ही बड़े-बड़े सिद्ध, सन्त और भक्त श्वेत विग्रह वाले पवन पुत्र के दर्शन के लिए यहाँ पधारते हैं। कैंची धाम के प्रख्यात सन्त नीम करोरी बाबा यहाँ प्रायः पधारते थे और पंडित राधेश्याम कथावाचक यहाँ दर्शन लाभ करने आया करते थे। इस सिद्धधाम में आनन्द,
ऊर्जा और शान्ति की तरंगे निरन्तर स्पन्दित होकर साधकों की कठिनाइयों को चूर-चूर करती और लाखों नर-नारियों की मनोकामना पूर्णकर उन्नति और प्रगति के मनोरम सोपनों पर आरूढ़ करती रही हैं। बाबा की अनुकम्पा से साधकों के सब संकट कट जाते हैं। अमंगल दूर हो जाते हैं और उन्नति के नये-नये द्वार खुलने लगते हैं।
9 नवम्बर, 2006 को बाबा रामदास हनुमान मन्दिर ट्रस्ट का गठन यहाँ की व्यवस्था को सुचारू रूप देने के लिए किया गया है। इससे अधिकाधिक भक्तजन यहाँ आकर लाभान्वित होंगे। इस प्रेरणादायी सिद्धभूमि में आपका स्वागत है।

पवनतनय, संकट हरण मंगल मूरति रूप।
राम-लखन-सीता सहित-हृदय बसुह सुर भूप।।

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